अडानी गोड्डा परियोजना भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग
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Adani Godda
अडानी गोड्डा परियोजना भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग
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अडानी गोड्डा परियोजना: भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग
भारत और बांग्लादेश, गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक बंधनों से जुड़े देश, 21वीं सदी में आपसी सहयोग को एक नए आयाम पर ले जा रहे हैं। इस सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है – अडानी गोड्डा परियोजना। यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बल्कि यह भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों का भी प्रतीक है।
अडानी गोड्डा परियोजना: एक विजन का साकार होना अडानी गोड्डा परियोजना की जड़ें वर्ष 2015 में वापस जाती हैं, जब अडानी पावर लिमिटेड और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इस समझौते के तहत, अडानी पावर झारखंड के गोड्डा जिले में एक 1320 मेगावाट क्षमता वाला सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट का निर्माण और संचालन करेगा। परियोजना को नवंबर 2017 में वित्तीय स्वीकृति मिली और इसके बाद तेजी से निर्माण कार्य शुरू हुआ।
यह परियोजना कई मायनों में अद्वितीय है। यह भारत का पहला ट्रांसनेशनल पावर प्रोजेक्ट है, जिसका 100% उत्पादन पड़ोसी देश बांग्लादेश को निर्यात किया जाता है। परियोजना में अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो उच्च दक्षता और कम उत्सर्जन सुनिश्चित करती है। इसके अतिरिक्त, परियोजना को पर्यावरणीय स्थिरता को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिसमें प्रदूषण कम करने के लिए नवीनतम उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियां शामिल हैं।